कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

Image
आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

जिस व्यक्ति में यह ६ गुण होते है वो जीवन में कभी असफल नहीं होता चाणक्य नीति


दोस्तों आचार्य चाणक्य एक महान ज्ञानी के साथ साथ एक अच्छे नीतिकार भी थे. उन्होंने अपनी नीतियों में ऐसे ६ गुणों का जिक्र किया है. जिन्हें प्राप्त करने वाला मनुष्य स्वर्ग के सामान सुख प्राप्त करता है.

आचार्य चाणक्य अपने श्लोक में कहते है.

सत्यं माता पिता ज्ञानं धर्मो भ्राता दया सखा। शान्तिः पत्नी क्षमा पुत्रः षडेते मम बान्धवाः॥

RelianceTrends CPV (IN)

सत्य

चाणक्य कहते है सत्य को अपनी माता के सामान समझना चाहिए. जैसे माता अपने पुत्र की रक्षा करती है. उसे अच्छे संस्कार देती है. उसी तरह सत्य मनुष्य की रक्षा करता है. उसे अच्छा संस्कार देता है.

ज्ञान

आचार्य चाणक्य के अनुसार ज्ञान को अपने पिता का दर्जा देना चाहिए. जैसे अपने पिता का सहारा लेकर मनुष्य जीवन की मुश्किलों को दूर करता है. उसी तरह ज्ञान मनुष्य के जीवन में फैला अंधकार दूर करता है और जीवन में आगे बढ़ने में मदत करता है.

धर्म

चाणक्य कहते है धर्म को अपना भरता समझना चाहिए. जिस तरह आपका भाई आपकी मदत करता है. आपको बुरी आदतों से बचाने की कोशिश करता है. उसी तरह धर्म के मार्ग पर चलने वाले लोग हमेशा सम्मान ही प्राप्त करते है. इसीलिए सदैव धर्म का अपने भ्राता की आज्ञा के सामान पालन करना चाहिए.

दया

दया को अपने मित्र की तरह समझना चाहिए. जिस तरह आपका मित्र आपकी भूल को क्षमा कर आपसे मित्रता का रिश्ता निभाता है. उसी तरह मनुष्य को दुसरो पर दया कर के अपने उदार मन का प्रदर्शन करना चाहिए. गरीब की मदत करने वाले लोग पुन्य कमाते है.

शांति

चाणक्य के अनुसार शांति को अपनी पत्नी समझना चाहिए. जिस तरह आपकी पत्नी जीवन भर आपका साथ देती है. उसी तरह शांति आपके जीवन के कठिन समय में आपका सहारा बनती है. सदैव अपने मन को शांत रखने का प्रयास करे.

क्षमा

चाणक्य कहते है क्षमा को अपना पुत्र समझना चाहिए. जिस तरह आप अपने पुत्र की भूल को क्षमा करते है. उसी तरह आपको अन्य लोगो को भी क्षमा कर देना चाहिए. क्षमा करने पर दुश्मन भी दोस्त बन जाते है.

तो ये थे वह ६ गुण जिनसे संबंध बनाने पर मनुष्य को स्वर्ग के सामान सुख प्राप्त होता है.

Comments

Popular posts from this blog

शेषनाग भगवान शिव पर हुए थे क्रोधित, जिसका भयंकर प्रभाव आज भी भोग रहा है कलयुग

किसीको भी वश में करें हनुमान वशीकरण मंत्र से

भगवन शिव ने बताई थी कलयुग की 5 भयंकर बातें, जिसने जान ली वह हमेशा रहेगा खुश