कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

भगवन शिव ने बताई थी कलयुग की 5 भयंकर बातें, जिसने जान ली वह हमेशा रहेगा खुश

दोस्तों ग्रंथों के मुताबिक भगवान शिव ने पार्वती जी को कई ऐसी बातें बताई थी जो आज के कलयुग में बहुत काम आ सकती हैं। भगवान शिव ने देवी पार्वती को 5 ऐसी बातें बताई थी जो आज के हर मनुष्य के लिए उपयोगी है। इन पांच बातों का पालन इस कलयुग में हर किसी को करना चाहिए। तो आइए दोस्तों जानते हैं कौन कौन सी थी वह पांच बातें।

1. भगवान शिव ने देवी पार्वती को पहली बात बताई थी, कीसबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा पाप क्या है। भगवान शिव ने कहा था कि मनुष्य के लिए सबसे बड़ा धर्म है सत्य बोलना या उस का साथ देना और सबसे बड़ा पाप है असत्य बोलना या फिर उस का साथ देना। इसीलिए आपको अपने निजी जीवन में या अपने किसी भी काम में उन लोगों को शामिल करना चाहिए जो सच्चे हैं। क्योंकि असत्य बोलना या उसका साथ देना मनुष्य की बर्बादी का कारण बन सकता है।

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2. इंसान को अपने हर काम का साक्षी खुद को ही बनाना चाहिए। चाहे वह काम अच्छा हो या बुरा। कई लोगों को गलत काम करते हुए यह भाव मन में रहता है कि उनके कर्मों को कोई नहीं देख रहा है और इसी वजह से वह पाप की ओर बढ़ते जाते हैं। जबकि उनके कर्मों का साक्षी वह खुद होते है।

3. भगवान शिव कहते हैं कि मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे उसका फल भोगना पड़ता है। इसीलिए अपने मन में कोई भी ऐसी बात नहीं आने देनी चाहिए जो अच्छी ना हो। ना हीं अपने मुख से कोई ऐसी बात निकालनी चाहिए और ना ही ऐसा कुछ काम करना चाहिए जिससे दूसरों को कोई परेशानी या दुख पहुंचे।

4. चौथी बौद्ध भगवान शिव ने बताई थी, कि संसार में हर मनुष्य को किसी न किसी मनुष्य, व्यक्ति या परिस्थिति से लगाव होता ही है। लगाओ और मैं एक ऐसा जाल होता है जिसे छूट पाना बहुत मुश्किल होता है। और इस से छूटे बिना मनुष्य सफलता को नहीं पा सकता है।

5. आखरी बात भगवान शिव मनुष्य को चेतावनी देते हुए कहते हैं, कि मनुष्य के इच्छाओं से बड़ा कोई मोह नहीं होता। मनुष्य का अपने मन पर वश नहीं होता, हर इंसान के मन में कई अनावश्यक इच्छाएं होती हैं। और यही इच्छा है मनुष्य के दुख का कारण बनती है। जरूरी है कि मनुष्य अपनी इच्छाओं और जरूरतों में फर्क समझे, और शांत मन से जीवन व्यतीत करें।

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