कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

भगवान को दे रहे थे गाली, फिर हुआ ये...


भगवान इस दुनिया में सबसे श्रेष्ठ है। सचमुच इस दुनिया को रचने वाला है। वो सभी का पिता है… उसे हम सही रीति जानते तक नहीं, ना कभी देखा पर फिर भी वो हमारे दिलों में बसा हुआ है। अगर आपसे पूछा जाए क्या भगवान हर जगह है तो आपका क्या जवाब होगा?

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भगवान: कल्पना या सच

ऐसा संभव हो सकता है कि कई लोगों के लिए भगवान सिर्फ़ एक कल्पना है। कुछ लोग भगवान को मानते तक नहीं है, पर ज्यादातर लोगो का मानना है कि वो हर जगह है, कण-कण में है। जो यह मानते हैं कि भगवान कण-कण में है! उनके लिए भगवान खुद कहते हैं कि तुम मुझे आज तक गाली दे रहे थे, मैं कण-कण में नहीं हूं। ये परमात्मा के स्व-उच्चारण किए हुए शब्द हैं, जो सच्ची गीता से लिए गए हैं।

पर अगर लोगों ने कहा है तो कहीं से तो यह बात आई होगी। सच्चाई यह है कि द्वापर युग जब अपने शुरुआती घड़ियों में था, भगवान के लिए सभी का भक्ति भाव बहुत ज्यादा था। वो लोग कहते थे कि परमात्मा घट-घट का वासी है, घट एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘दिल’... तो उस समय लोग कहते थे कि भगवान हमारे दिलों में बसता है। पर जैसा कि आप जानते हो लोगों को अर्थ का अनर्थ बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता।

समय के साथ-साथ ये अनर्थ भी हुआ और सभी ने मान भी लिया कि भगवान हर जगह है। जबकि गीता में खुद उसने कहा है कि मैं ब्रह्म लोक का निवासी हूँ। आप ही जरा सोचिए अगर वो हर जगह होता तो आज लोग क्यों उसे मंदिरों में जाकर, तीर्थ यात्रा करके… ढूंढने की कोशिश करते। जहाँ भगवान होते है वहां उनके गुण भी तो दिखने चाहिए ना? अगर हमारे अंदर भगवान होता तो आज हम इतने परेशान नहीं होते, किसी को दुख नहीं देते ना ही खुद दुखी होते।

जानिए सत्य पीता को

जब वो है ही एक तो हर जगह कैसे हो सकता है? भगवान का रूप हर धर्म में निराकार ही दिखाया गया है! हिंदुओं में सिर्फ परमात्मा शिव का ही रूप वैसा है, और वो हर जगह नहीं है, आज हर कोई कहता है कि भगवान ऊपर वाला है… सचमुच वो ब्रह्मलोक का निवासी है! गीता में जिसे छठा तत्व कहा गया है, वह लोक इस सूर्य, चांद, सितारों से पार है, जहां हमारा पीता परमात्मा शिव रहतें है, वही हम सभी आत्माओं का घर भी है।

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