कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

महाभारत के युद्ध में मारे गये लोगो के शव कहा गये, जानिए

हमारा यह भारत देश कई सारे युद्धों से भरा पड़ा है, न जाने इस देश की धरती पर कितने युद्ध हुए है और कितने लोग मारे गये है. इनमे से एक ऐसा ही सबसे भयानक और सबसे ख़तरनाक युद्ध था जिनको हम महाभारत के नाम से जानते है, यहाँ पर कई सारे खून की नदियाँ बही है. पर क्या आप जानते है इस युद्ध में मारे गये लोगो के शब कहा गये.

भगवान श्रीराम ने रामसेतु बनवाया था वो पुल वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है पर महाभारत का वोह खतरनाक युद्ध कहा पर घटित हुआ था उसका प्रमाण आज भी उनको नहीं मिला है. लोगो की ऐसी मान्यता है की महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ था.
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यदि युद्ध वहा पर हुआ था को वहा पर करोड़ो सैनिको और योद्धाओं मारे गये थे उनके शव और अस्थियाँ कहा पर गयी आज तक किसी को भी पता नहीं है, आज के ज़माने में दुश्मनों के शव के साथ जो दुर्व्यवहार किया जाता है ऐसा पहले नहीं हुआ था.

महाभारत के युद्ध को दिन के ढलते ही रोक दिया जाता था और जिन लोगो के शव भूमि पर पड़े हुए होते थे तो उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाता था या उसको कोई पह्चानले तो उनके परिवार को सौंप दिया जाता था.

कुछ इतिहासकारों का मानना है की उत्तरायन के दिन जब भीष्म पितामाह ने अपनी अंतिम साँस ली थी तो उसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था और उसके बाद कुरुक्षेत्र की भूमि को जला दिया गया था ताकि सभी योद्धा को मुक्ति मिल सके और उनका शुद्धिकरण भी हो जाये.

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