कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

Image
आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

सोमवार के दिन इन मंत्रो के जाप से बनेंगे आपके सभी बिगड़े काम

हिंदू धर्म में कोई भी पूजा मंत्रों के उच्चारण के बिना अधूरी मानी जाती है। इसलिए पूजा करते समय मंत्रों का जाप करना महत्वपूर्ण माना जाता है। और खासकर अगर बात शिव की पूजा की हो, तो माना यह जाता है कि यदि भगत भोलनाथ की पूजा न भी कर सक तो केवल शिव मंत्रों के जप कर लेने मात्र से ही इसका पूरा फल प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा व्यक्ति यदि सोमवार का व्रत करता है, तो मंत्रों के साथ पूजा करने से वह भगवान शिव की कृपा का प्राप्त कर सकता है।

नामावली मंत्र

भगवान शिवजी को प्रसन्न कर उनकी कृपा की प्राप्ती के लिए सोमवार की पूजा के दौरान, इन नामवली मंत्रों का उच्चारण करें तो आपको फल जरुर मिलता है। सोमवार में किसी भी समय 108 बार इन मंत्रो का जाप अवश्य करें। अगर आप पूरे माह नियमित रूप से सुबह और शाम इन मंत्रो के 108 बार जाप करते है तो आपकी किस्मत चमक जाती है और भगवान शिव की कृपा आप पर सदेव रहती है। पूजा के पश्चात भगवान शिव के इन नामावली मंत्रों के साथ उनका ध्यान करना शिव जी को प्रसन्न करता है।

RelianceTrends CPV (IN)

।। श्री शिवाय नम: ।।

।। श्री महेशवराय नम: ।।

।। श्री शंकराय नम: ।।

।। श्री सांबसदाशिवाय नम: ।।

।। श्री रुद्राय नम: ।।

।। ॐ नमो नीलकण्ठाय ।।

।। ॐ पार्वतीपतये नमः ।।

Comments

Popular posts from this blog

शेषनाग भगवान शिव पर हुए थे क्रोधित, जिसका भयंकर प्रभाव आज भी भोग रहा है कलयुग

किसीको भी वश में करें हनुमान वशीकरण मंत्र से

भगवन शिव ने बताई थी कलयुग की 5 भयंकर बातें, जिसने जान ली वह हमेशा रहेगा खुश