कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

इन कारणों से नहीं मिलता किस्मत का साथ, पांच मिनिट की इस पूजा से जाग उठेगा सोया हुआ भाग्य


जीवन में भाग्य का सबसे ज्यादा महत्व है। कई लोगों को बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के धन-यश-सम्मान प्राप्त हो जाता है जबकि कई हुनरमंद जीतोड़ मेहनत के बाद भी असफलता ही पाते हैं। इसे भाग्य का खेल कहा जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार नौ ग्रहों में बृहस्पति- गुरु भाग्य के कारक माने जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह से संबंधित कोई दोष होता है तो उसे भाग्य का साथ नहीं मिल पाता है। बृहस्पति चूंकि भाग्य का कारक ग्रह ह इसलिए कुंडली में इसकी स्थिति अच्छी होना अनिवार्य है अन्यथा जीवन भर ठोंकरे ही खाते रहेंगे। बृहस्पति अर्थात् गुरु ग्रह से शुभ फल पाने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं।
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शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित जनार्दन शुक्ला के अनुसार गुरु ग्रह के ये उपाय गुरुवार को किए जाने चाहिए। इससे भाग्य की बाधाएं दूर हो सकती हैं, सोया हुआ भाग्य जाग उठता है।
गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें या भगवान ब्रह्मा की पूजा करें। बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए शिवपूजा का भी बड़ा महत्व है। इसके लिए तांबे के लोटे में पानी लें और इसमें केसर मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। भाग्य से जुड़ी परेशानियां खत्म करने के लिए यह उपाय सबसे अच्छा है।

गुरुवार को घर में गंगाजल छिडक़ने के बाद द्वार पर स्वस्तिक बनाकर इसकी पूजा करें । गुरुवार को सुबह जल्द उठकर स्नान कर किसी मंदिर में जाएं और छोटे बच्चों को केले वितरित करें।

सबसे कारगर उपाय
बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए सबसे कारगर उपाय है उनके मंत्र का जाप करना। बृहस्पति के सरल मंत्र ऊं बृं बृहस्पतयै नम: का जाप करें। शुक्ल पक्ष के किसी भी गुरुवार को यह जाप शुरु करें। ४० दिना में कम से कम १६ हजार जाप करें। हो सके तो यह जाप हमेशा करें, जीवन में सर्वसुख प्राप्त करनेे के लिए बृहस्पति देव का आशीर्वाद प्राप्त होता रहेगा।

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