कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

भीष्म ने युधिस्ठिर को बताई थीं ये चार महत्वपूर्ण बातें जिससे मृत्यु को भी टाला जा सकता है


मह्हभारत के युद्ध में भीष्म ने निश्चय ही अधर्म की ओर से लड़ने का संकल्प लिया था किन्तु वह अपनी प्रतिज्ञा और ताप के कारण इतने बलशाली थे की जबतक वह सामने खड़े रहते तब तक कौरवों का कोई बाल भी बांका नहीं कर सका | उनको मार्ग से हटाने के लिए स्वयं भगवान् कृष्ण को अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर सुदर्शन धारण करना पड़ा था |

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अंत में बाणों की शैय्या पर लेते हुए भीष्म ने युधिस्ठिर को चार महत्वपूर्ण बातें बताई थीं, जिनका पालन यदि कोई भी प्रतिज्ञा के साथ करेगा तो निश्चय ही वह व्यक्ति मृत्यु को भी ताल सकता है | यह हैं वे चार बातें |

१: हिंसा का त्याग करना : यदि कोई व्यक्ति अहिंसा को अपने जीवन में धारण करता है और सभी के साथ मन से प्रेमपूर्वक व्यवहार रखता है तो ऐसा व्यक्ति ईश्वर का सबसे प्रिय होता है और ऐसे व्यक्ति को ईश्वर सभी कष्टों से बचाता है |

२: सत्य का साथ देना: भीष्म ने कहा कि जो व्यक्ति सत्यता के मार्ग पर चलता है उस व्यक्ति में इतनी ऊर्जा होती है कि मृयु भी उसे छूने से पहले विचार करे |

३: छल कपट कभी न करना: जिस व्यक्ति का मन निश्छल होता है, ऐसा व्यक्ति ईश्वर के सबसे समीप हो जाता है | ऐसे व्यक्ति पर यदि काल भी समक्ष आ जाए तो ईश्वर उसकी ढाल बनकर स्वयं आगे खड़े रहते हैं|

४: क्रोध न करना : जिस व्यक्ति ने अपने क्रोध पर काबू प् लिया उसने अपने जीवन का आधा से अधिक शंघर्ष ख़त्म कर लिया | क्रोधित व्यक्ति का शरीर, मन और आत्मा मलिन होती जाती हैं जिससे वह काल के समीप होता चला जाता है | अतः इससे दूर रहने में ही भलाई है |

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