कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

दावा : जीसस क्राइस्ट थे भारतीय, नाम था केशव कृष्णा, करते थे शिव पूजा


वीर सावरकर यानी विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर द्वारा लिखी गई एक किताब से खुलासा होता है कि जीसस क्राइस्ट जन्म से एक तमिल हिंदू थे.

यह किताब RSS के फाउंडर्स में से किसी एक ने सन 1946 में लिखी थी. अब यही किताब मुंबई के दक्षिणपंथी विचारधारा को मानने वाले एक ट्रस्ट के द्वारा पुनः जारी की जा रही है. ‘क्राइस्ट परिचय’ नामक इस किताब में लिखा गया है कि जीसस मूलरूप से एक विश्वकर्मा ब्राह्मण थे तथा जो इसाई धर्म है यह हिंदुत्व की ही एक शाखा है.

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यह पुस्तक मराठी भाषा में छपकर 26 फरवरी को बाज़ार में आ रही है. रिलीज करेगा स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक.

इस पुस्तक में जो खुलासे किए गए हैं वह इस प्रकार से हैं.

जीसस एक तमिल हिंदू थे. जिनका असली नाम था केशव कृष्णा. स्वाभाविक है उनकी मातृभाषा तमिल थी. उनके त्वचा का रंग भी सांवला था. जब वे 12 वर्ष के थे तब उनका ब्राह्मण रीति रिवाज से जनेऊ संस्कार किया जा चुका था. उनके पूरे परिवार का पहनने-ओढ़ने का तरीका भी खालिस हिंदुस्तानी था. इसमें बताया गया है कि इसाई कोई अलग धर्म नहीं बल्कि जीसस ने हिंदुत्व में से इसे निकाल कर यह पंथ चलाया.

किताब में लिखा गया है कि जीसस को सूली पर चढ़ाने के पश्चात उन्हें बचा लिया गया था. आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सेवन कराकर उनको जीवन दी गई. जीवन का अंतिम समय उन्होंने हिमालय पर्वत पर बिताया.

वहां पर कश्मीर में रहते हुए उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अराधना की. शिवजी ने प्रसन्न होकर उनको दर्शन भी दिया. 49 वर्ष की आयु में उन्होंने शरीर छोड़ने का संकल्प किया तथा समाधि में चले गए. अरब देश हिंदुओं की धरती है तथा यहूदी हिंदू थे. अरबी भाषा में संस्कृत तथा तमिल के अनेकों शब्द मौजूद हैं. फिलिस्तीन में बोली जाने वाली अरबी भाषा तमिल का ही एक वर्जन है.

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