कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

मलमास में तुलसी की पूजा करने से मिलती है श्रीहरि की कृपा


16 मई से अधिक मास प्रारंभ हो चुका है और हिन्दू धर्म के अंतर्गत यह महीना किसी भी शुभ कार्य के लिए सही नहीं माना जाता है। इस दौरान कोई भी नया कार्य जैसे कि गृह प्रवेश, विवाह आदि से नहीं किए जाते। यह महीना मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है जो भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए अधिकमास या मलसाम में भगवान विष्णु की आराधना की जाती है, उन्हें प्रसन्न रखने के लिए विभिन्न पूजाएं और पाठ किए जाते हैं। भगवान विष्णु को तुलसी का पौधा अत्यंत प्रिय है, इसलिए मलमास के दौरान तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन तुलसी पूजा के दौरान आपको क्या करना चाहिए और किन बातों का ख्याल रखना चाहिए, आइए जानते हैं।

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तुलसी के पौधे को रोज सुबह-शाम जल चढ़ाएं और शाम के समय घी का दीपक भी जलाएं। एक बात का ध्यान हमेशा रखें कि पूजा के दौरान कभी तुलसी के पौधे को स्पर्श ना करें।
दिन और रात के समय तुलसी पूजा करते समय तुलसी मंत्र “वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।। एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता” का जाप अवश्य करें, लेकिन एक बात का ध्यान आपको अवश्य रखना चाहिए कि शाम होने के बाद तुलसी के पौधे की परिक्रमा नहीं की जानी चाहिए।
तुलसी के इस मंत्र का जाप करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी कृपा जातक पर बरसती है और जीवन में आने वाली परेशानियां पहले ही मुंह मोड़ लेती हैं या आपसे दूर हो जाती हैं।
तुलसी पूजा करते समय साथ में शालीग्राम या सालीग्राम अवश्य रखें। यह भगवान विष्णु का ही एक रूप है।
पुरुषोत्तम मास के दौरान तुलसी की अच्छी तरह साफ-सफाई की जानी चाहिए। जो पत्ते खराब हो गए हैं, सूख गए हैं या पीले पड़ चुके हैं उन्हें हटा दें। तुलसी में नियमित रूप से पानी डालें और गर्मी की कड़ी धूप से तुलसी को अवश्य बचाकर रखें।

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