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Showing posts from May, 2018

कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

आज रात 12:00 बजे से आने वाले पूरे 4 साल तक इन 4 राशि वालों पर रहेगी मां लक्ष्मी की कृपा

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आज रात 12:00 बजे से आने वाले पूरे 4 साल तक 4 राशि वालों पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहेगी, जिससे इनके जीवन में आ रहे सभी संकटों पूरी तरह से खत्म होने वाली है। इन्हें भाग्य का साथ मिलने वाला है। तो चलिए जानते हैं उन 4 राशि वालों के बारे में जिन पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहेगी। आज रात 12:00 बजे से आने वाले 4 साल तक पूरे 4 राशि वालों पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी। आने वाले 4 सालों में आपको खूब सारी खुशियां मिलने वाली है। बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। यह खुशखबरी आपको अपने रिश्तेदारों से और दोस्तों से मिलने वाली हैं। इस खुशखबरी से आपके घर में कोई बडा शुभ कार्य भी हो सकता है। इससे घर मे आनंद का माहौल बना रहेगा। आप जिस कार्य को हाथ में लेंगे वह कार्य समय पर पूरा करेंगे। व्यापार क्षेत्र आपका लक बहुत ही फायदेमंद साबित होगा। अगर आप व्यवसाय करने की सोच रहे हो तो, इससे आपको आगे चलकर बहुत बड़ा मुनाफा मिलना शुरू होगा और जो लोग नौकरी कर रहे हैं, उन्हें भी इन 4 सालों में भारी बढ़ोतरी होती हुई दिखेगी। इस तरह से आज रात 12:00 बजे से आने वाले 4 साल तक कन्या, सिंह, तुला और कु...

राशिफल 31 मई, कैसा रहेगा आपके लिए गुरुवार का दिन, जानिए

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मेष राशि :- आज अपने काम पर पूरा ध्यान दें, क्योंकि एक साधारण गलती से आपको अपना काम भी मिल सकता है। अजनबियों से निपटने के दौरान व्यापार क्षेत्र में लोगों को सावधान रहना चाहिए, क्योंकि उनके दिल में आपकी सबसे अच्छी रुचि नहीं हो सकती है। हालांकि, शाम को आपके दिन की हाइलाइट अच्छी खबर होगी। वृषभ :- यह आपको अपने जीवन में उनके महत्व का एहसास कर सकता है। अनावश्यक रूप से खर्च करना आपके बजट को परेशान कर सकता है। हालांकि यह आपके व्यापार के लिए एक अच्छा दिन होगा। आपके व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद आपका स्वास्थ्य अच्छा होगा। मिथुन राशि :- यह आपके वित्त के लिए एक अच्छा दिन होगा। आय के नए स्रोत आपके लिए खुलेंगे, जो आपके वित्त को बेहतर बनाने में मदद करेगा। बहुत अधिक तनाव लेने से बचें, क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। कर्क :- बहुत अधिक तनाव आपकी सकारात्मकता को बर्बाद कर देगा। आपको ऐसे मुद्दों के बारे में धैर्य रखने की जरूरत है। एक बड़ा वित्तीय लाभ आपके वित्त को मजबूत करेगा और आपको ऋण चुकाने में सक्षम करेगा। नए निवेश अच्छे रिटर्न लाएंगे। सिंह :- यह...

महाभारत मे भगवान श्री कृष्ण ने क्यूँ नहीं बचाया था अभिमन्यु को

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व्यक्ति के कर्मों पर किसी का भी वश नहीं होता, उसे सिर्फ सही या गलत मार्गदर्शन दिया जा सकता है, अपने जीवन मार्गों के विकल्प दिए जा सकते हैं और सत्य तो यह है कि ईश्वर भी कभी किसी प्राणी के कर्मों और उसकी नियति में हस्तक्षेप नहीं करते है। अभिमन्यु हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है, इस योद्धा ने महाभारत के युद्ध में अकेले एक पूरे दिन उन सभी योद्धाओं को रोक कर रखा था, जो अकेले कई सेना के बराबर थे परंतु साथ में हम यह भी सोचते हैं कि अभिमन्यु जैसा वीर उस दिन वीरगति को प्राप्त ना हुआ होता तो, बहुतों के मन में यह भी प्रश्न उठता है कि यदि भगवान श्रीकृष्ण चाहते तो अभिमन्यु को बचा सकते थे क्योंकि वह ईश्वर थे, त्रिकालदर्शी थे परंतु उन्होंने इसमें कोई भी हस्तक्षेप नहीं किया और फिर भी हम भगवान श्री कृष्ण के हस्तक्षेप ना करने के कारण को महाभारत की इस छोटी सी कथा से जानने का प्रयास करेंगे। महाभारत के अनुसार जैसा कि हम सभी जानते हैं कि धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु अवतार लेते हैं एवं उनकी सहायता के लिए दूसरे देवतागण भी विभिन्न स्थानों पर जन्म लेते हैं, द्वापर युग में जब भगवान विष्णु ने भग...

भगवान को दे रहे थे गाली, फिर हुआ ये...

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भगवान इस दुनिया में सबसे श्रेष्ठ है। सचमुच इस दुनिया को रचने वाला है। वो सभी का पिता है… उसे हम सही रीति जानते तक नहीं, ना कभी देखा पर फिर भी वो हमारे दिलों में बसा हुआ है। अगर आपसे पूछा जाए क्या भगवान हर जगह है तो आपका क्या जवाब होगा? भगवान: कल्पना या सच ऐसा संभव हो सकता है कि कई लोगों के लिए भगवान सिर्फ़ एक कल्पना है। कुछ लोग भगवान को मानते तक नहीं है, पर ज्यादातर लोगो का मानना है कि वो हर जगह है, कण-कण में है। जो यह मानते हैं कि भगवान कण-कण में है! उनके लिए भगवान खुद कहते हैं कि तुम मुझे आज तक गाली दे रहे थे, मैं कण-कण में नहीं हूं। ये परमात्मा के स्व-उच्चारण किए हुए शब्द हैं, जो सच्ची गीता से लिए गए हैं। पर अगर लोगों ने कहा है तो कहीं से तो यह बात आई होगी। सच्चाई यह है कि द्वापर युग जब अपने शुरुआती घड़ियों में था, भगवान के लिए सभी का भक्ति भाव बहुत ज्यादा था। वो लोग कहते थे कि परमात्मा घट-घट का वासी है, घट एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘दिल’... तो उस समय लोग कहते थे कि भगवान हमारे दिलों में बसता है। पर जैसा कि आप जानते हो लोगों को अर्थ का अनर्थ बनाने में ज्या...

शव यात्रा दिखे तो चुपचाप करें ये काम, जाग उठेगी सोई हुई किस्मत

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शास्त्रों के अनुसार जब मनुष्य का बुरा समय शुरू होता है, उसको कंगाल बना देते हैं। लेकिन शास्त्रों में इस बुरे वक्त को दूर करने के बहुत से उपाय बताए गए हैं। शास्त्रों के अनुसार बुरे समय से बचने के लिए अगर आपको कहीं शव यात्रा दिखे तो चुपचाप निम्न काम कर लेना चाहिए, इससे आपकी सोई हुई किस्मत जाग जाएगी, तो आइए जान लेते हैं। दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं, मृत्यु एक अटल सत्य है और जो व्यक्ति इस संसार में जन्म लेता है, वह 1 दिन अवश्य मृत्यु को प्राप्त होता है। जब मृत व्यक्ति का दाह संस्कार करने ले जाया जाता है, तो उसे शव यात्रा के नाम से जाना जाता है। जब आपके सामने अचानक से शव यात्रा आ जाए, आपको तुरंत हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए तथा मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से दुआ मांगनी चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है कि ऐसा काम करने से उस मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा उसका बुरा समय नष्ट हो जाता है। दोस्तों इस पोस्ट से संबंधित अपने प्यारे-प्यारे विचार हमें कमेंट में बताएं।

माता सीता का दिया श्राप आज भी सहना पड़ रहा है इनको, जानकार हो जाओगे हैरान

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माता सीता का दिया हुआ श्राप इन्हें आज भी भुगना पड़ रहा है। दुनिया में ऐसी कई सारे श्राप हैं, जिसका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है। इनमें ऐसा एक श्राप रामायण में माता सीता द्वारा दिए गए श्राप की सजा आज भी इन चारो को भुगतनी पड़ रही है। इस श्राप के अनुसार जब राजा दशरथ की मृत्यु के पश्चात वनवास से लौटकर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता सीता पितृपक्ष के दौरान राजा दशरथ का श्राद्ध करने के लिए फाल्गु नदी के किनारे गए थे, तब वहां पिंडदान के लिए कुछ सामग्री कम पड़ गई थी, जिसे लेने के लिए भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण नगर की ओर लौट आते हैं परंतु नगर मैं उन्हें काफी समय लग जाता है, जिससे पंडित माता सीता को कह रहा था कि पिंड दान का समय निकलता जा रहा है। माता सीता की चिंता बढ़ने लगी, तब माता सीता ने वहां मौजूद फाल्गु नदी, केतकी के फूल, गाय और पंडित को साक्षी मानकर स्वर्गीय राजा दशरथ के नाम पर पिंडदान दे दिया, क्योंकि भगवान श्रीराम एवम लक्ष्मण को नगर से आने में देर हो चुकी थी, इसलिए यह पिंडदान माता सीता ने अकेले ही कर दिया, क्योंकि पिंडदान का मुहूर्त निकल जाने के बाद पिंड दान का कोई महत्व ही ...

क्या आप जानते हैं दुनिया में कौन सा धर्म सबसे बड़ा है नहीं तो, जानिए

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दोस्तों इस दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनको आज तक इस बारे में नहीं पता है कि इस दुनिया में सबसे बड़ा धर्म कौन सा है, तो आज हम आपको इस दुनिया के सबसे बड़े धर्म के बारे में बताने जा रहे हैं और और किस धर्म का वर्चस्व सब धर्मों में से अलग है। हर इंसान अपने धर्म को सबसे बड़ा धर्म मानता है परंतु इस दुनिया में हर इंसान किस धर्म को ज्यादा अहमियत देते हैं, तो आइए जानते हैं। ईसाई धर्म दोस्तों इस दुनिया में जनसंख्या के आधार पर ईसाई धर्म बड़ा धर्म है। इस दुनिया में इस धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या लगभग 220 करोड़ से ज्यादा है। इसीलिए इस पूरी दुनिया में 31।50% इस धर्म के लोगों की संख्या है और यह धर्म 2000 साल पूर्व से चला रहा है। इस धर्म के लोग ईसा मसीह के जीवन को उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में जोड़ ते हैं और इस इसाई धर्म को इस पूरी दुनिया में हर इंसान मानते हैं। मुस्लिम धर्म मुस्लिम धर्म पूरी दुनिया में नंबर दो पर आता है। मुस्लिम धर्म को इस दुनिया में मानने वाले लोग 160 करोड़ से ज्यादा है और इस धर्म के अनुयायियों की संख्या 22 पॉइंट 32% है और यह धर्म सभी धर्मों से ज्या...

30 मई राशिफल, जानिये कैसा रहेगा आज आपका दिन…

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मेष राशि- आज आपको भूमि परियोजनाओं पर ध्यान केन्द्रित करने की ज़रूरत है। आप दफ़्तर में कामकाज के स्तर में सुधार को महसूस कर सकते हैं। कोई आध्यात्मिक गुरू या बड़ा आपकी सहायता कर सकता है। अपने जीवनसाथी से आप आज परेशान हो सकते हैं, लेकिन वह आपके लिए कुछ बढ़िया भी करने वाला है। वृष राशि- हर फ़ैसला तार्किक तरीक़े से लें। परिवार के साथ रिश्ते-नातों में नयी जान डालने का सही समय है। अपने प्रिय को समझने की कोशिश करें। आज किए गए निवेश काफ़ी फ़ायदेमन्द साबित होंगे, लेकिन आपको भागीदारों से विरोध का सामना करना पड़ सकता है। मिथुन राशि- दिन के दूसरे हिस्से में आर्थिक तौर पर फ़ायदा होगा। अगर आपको किसी ऐसी जगह से बुलावा आया है जहाँ पहले आप कभी नहीं गए हैं, तो कृतज्ञता से उसे स्वीकार कर लें। खुदरा और थोक व्यापारियों के लिए अच्छा दिन है। बढ़िया खाना, रोमानी पल और जीवनसाथी का साथ – यही ख़ास है आज। कर्क राशि- अपने बर्ताव में उदार बनें और परिवार के साथ प्यार भरे लम्हे गुज़ारें। अपने प्रिय को ख़ुश करना आपके लिए काफ़ी मुश्किल साबित होगा। किसी भी ख़र्चीले काम या योजना में हाथ डालने से पहले ठीक तरह से सोच...

आपके इष्ट देव कौन हैं, जानिए यहां!

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विश्वास के अनुसार, हर किसी के पास उनके प्रमुख देवता होते हैं। एक व्यक्ति उनकी पूजा अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है। कई लोग कुंडली के आधार पर देवता की अध्यक्षता तय करते हैं। हालांकि, देवता की अध्यक्षता के साथ ग्रहों और ज्योतिष का कोई संबंध नहीं होगा। इस देवता को जन्म पूर्व प्रसव के अनुष्ठान के आधार पर डिसाइड किया जाता है। इस मामले में, आपका अध्यक्ष देवता वह होगा जिसे आप बिना किसी कारण के आकर्षण देते हैं। ग्रह कभी भगवान की भविष्यवाणी नहीं करते हैं। इसलिए ज्योतिष के आधार पर अध्यक्ष देवता को कभी भी पूर्ववत न करें। हालांकि आप ग्रह से संबंधित समस्या से छुटकारा पाने के लिए भगवान-देवी की पूजा कर सकते हैं। सूर्य: सूर्य से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भगवान सूर्य की पूजा करें। गायत्री मंत्र का जाप करें। चंद्रमा: चंद्रमा से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव की पूजा करें। मंगल: मंगल से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भगवान हनुमान की पूजा करें। बुध: बुध से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए देवी दुर्गा की पूजा करें। बृहस्पति: ब...

राशिफल: 29 मई: कैसा रहेगा आपके लिए मंगलवार का दिन, जानने के लिए क्लिक करें

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मेष राशि वित्‍तीय पक्ष मजबूत रहेगा।पुराने मित्रों की याद सताएगी। लीक से हटकर कुछ नया करने का विचार आएगा। परिवार में हर्ष उल्‍लास का वातावरण रहेगा। प्रेम संबंधों के लिए समय अच्‍छा है। वृषभ राशि आमदनी और खर्च का संतुलन बनाकर चलें। जीवनसाथी को उपहार दे सकते हैं। खानपान का असर सेहत पर पड़ सकता है। व्‍यापार में लाभ की संभावना है। मिथुन राशि कोई नया काम आरंभ करने की योजना बनेगी। अापके प्रयास रंग लाएंगे। आपकी बौद्धिक क्षमता में इजाफा होगा। बच्‍चों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी। पारिवारिक रिश्‍तों में मधुरता आएगी। निवेश से लाभ। कर्क राशि आज का दिन आपके लिए लाभकारक है। कार्य-व्यवहार से जुड़े सभी विवाद आज सुलझ सकते हैं। नए प्रोजेक्ट पर भी कुछ काम शुरू हो सकता है। जमीन-जायदाद के मामले में पारिवारिक और आसपास के लोग कुछ परेशानी पैदा करने की कोशिश करेंगे। सिंह राशि आज आपको कारोबार की चिंता विशेष रूप से परेशान कर सकती है क्योंकि पिछले काफी दिनों से व्यवसाय नियमिति नहीं है। अस्थिरता आपका पीछा नहीं छोड़ रही है। नौकरी व व्यवसाय आदि के क्षेत्र में यदि आप पूर्ण सुधार चाहते हैं तो आपको आलस...

जिंदगी में एक ही युद्ध हारे थे हनुमान जी, जाने उस युद्ध के बारे मे

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आज हम आपको जो कहानी बताने जा रहे हैं वह कहानी है मच्छिंद्रनाथ जी एवं हनुमान जी के विषय में। एक बार मच्छिंद्रनाथ जी रामेश्वरम आते हैं। वहां भगवान श्रीराम का बनाया हुआ सेतु देखकर प्रसन्न हो जाते हैं और भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन होकर समुद्र में स्नान करने लगते हैं, तभी वहां हनुमान जी, जो कि एक बूढ़े वानर के रूप में बैठे होते हैं, उनकी नजर मछिंद्रनाथ पर पड़ती है। हनुमान जी यह जानते थे कि मछिंद्रनाथ जी एक सिद्ध योगी हैं परंतु फिर भी उनकी शक्ति की परीक्षा लेने हेतु हनुमान जी ने अपने लीला आरंभ करी और अचानक जोरदार बारिश कर दी तथा उस बूढ़े वानर रूपी हनुमान ने बारिश से बचने हेतु एक पहाड़ पर प्रहार किया, जिससे कि वह वहां गुफा बना सके। यह सब मच्छिंद्रनाथ जी देख रहे थे और उस बूढ़े वानर अर्थात हनुमान जी को कहते हैं, तुम यह क्या कर रहे हो, यहां क्या बना रहे हो, जब प्यास लगती है, तब कुआं नहीं खोदा जाता, तुम्हें अपने घर का पहले से ही इंतजाम कर लेना चाहिए था। यह सुनकर हनुमान जी उनसे पूछते हैं कि आप कौन हैं, इस पर मच्छिंद्रनाथ जी कहते हैं कि मैं एक सिद्ध पुरुष हूं और मुझे मृत्यु शक्ति ...

कहां गया शिवजी का धनुष?

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यह बात तब की है जब आज से बहुत समय पहले देवी देवताओ ने धरती पर पैर रखे थे उस समय धरती हिम युग की चपेट में थी।और शंकर दी ने कैलाश पर्वत को अपना निवास स्थान बनाया था। नमस्कार कैसे हैं सभी दोस्तों।और यह कोई ज्योतिषी या सेहत का चैनल नहीं है भाईयो यह तथ्य और सच्चाई जानने का माध्यम है हम आपको खुशी पाने और दिलाने का एक छोटा सा प्रयास करते हैं। तो आज बात करेंगे पिनाक धनुष की जिसे शंकर जी में खुद बनाया था मगर कही पर यह उल्लेख है कि विश्वकर्मा ने दो धनुष बनाए थे एक शिव को दिया और एक विष्णु जी को। शिव के धनुष का नाम पिनाक है। जब शिव ने पिनाक से सभी देवताओ का सर काटने को कहा तो सभी देवता कांप गए और शिव जी को मनाने लगे मगर भोला तो भोला है वह मान गए और कैलाश लोट आए। प्रसन्न होकर वह धनुष परशुराम को दे दिया तथा फिर परशुराम ने देवरात के यहा रखवा दिया। और ऐसे वह राजा जनक के समय तक देखभाल में रहा। फिर परशुराम ने भविष्यवाणी कर दी कि जनक तुम्हारी लड़की सिता की शादी उसी से होगी जो यह धनुष तोड़ देंगा और यह धनुष वही तोड़ सकता है जो सिता का जन्मो से पति है। आगे की कहानी आप जानते हैं त...

जो भी कर लेगा महादेव के इस प्रभावशाली मंत्र का जाप, उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकेगा

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वैसे तो सभी देवी देवताओं में भक्तों के लिए दया व प्रेम होता है लेकिन हिंदु धर्म में देखा जाए तो सबसे ज्यादा भगवान शिव को भोले स्वभाव का माना जाता है यही कारण है कि हम उन्हें भोलेभंडारी कहते है। कहा जाता है कि यदि कोई भक्त उन्हें श्रद्धा भाव व सच्चे मन से सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित कर दे तो भी भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। इनकी पूजा विधि-विधान से करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है और भक्त की सभी मनोकामनाएं जल्दी ही पूरी होती हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव की कृपा से गरीब भी अमीर बन जाता है। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिवपुराण में कई छोटे और अचूक उपायों के बारे में बताया गया है, ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है और इससे अपनाने से भगवान प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना जल्द पूरी कर देंगे। तो आज हम आपको उन्हीं उपायों में से एक अचूक उपाय बताने जा रहे हैं। वैसे तो भगवान शिव की पूजा में कई तरह के मंत्रों का जाप किया जाता है। अलग अलग मंत्र का जाप अलग कार्यसिद्धि के लिए किया जाता है। बता दें कि इन सभी मंत्रों में से भगवान को सबसे ज्यादा प...

कृष्ण व राधा का विवाह क्यों नहीं हुआ, यह था सबसे बड़ा कारण जानने के लिए आगे पढ़े

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दोस्तों आज हम आपको भगवान कृष्ण और राधा की प्रेम कहानी से जुड़े हुए उस प्रसंग के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके बारे में आपने शायद ही सुना हो कि भगवान श्री कृष्ण और राधा की शादी क्यों नहीं हो पाई थी इससे जुड़े ऐसी बातें हैं जो कि भगवान श्री कृष्ण और राधा के प्रेम प्रसंग को विवाह में नहीं बदल सकी। कृष्ण और राधा का विवाह क्यों नहीं हुआ: जब कृष्ण का राधा के प्रति प्रेम समाज को चुभने लगा था तो उस को घर से निकलने पर रोक लगा दी गई थी। किंतु कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर के राधा खुद को नहीं रोक पाती थी और वह श्री कृष्ण के पास दौड़ी चली आती थी यह देख कर के राधा के घर वालों ने उसे खाट से बांध दिया था। कृष्ण को राधा से कैसे हुआ था प्यार: भगवान श्री कृष्ण जब लगभग 8 साल के थे तब उन्हें ओखली से बांध दिया गया था तब राधा उनके पास आई थी। और उसी समय राधा की नजर श्री कृष्ण पर पड़ी थी उसी पल में राधा मेरा जीवन आधार बन चुकी थी इसी जगह से ही भगवान श्री कृष्ण और राधा का प्रेम प्रसंग चालू हुआ था। कृष्ण और राधा की शादी मैं क्या रूकावटें आए: जब कृष्ण ने माता यशोदा को बताया कि वह र...

शिवलिंग से जुड़ी हुई रहस्यमय बातें, जिन्हें जानकर रह जाएंगे हैरान

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आज मैं आपको शिवलिंग से संबंधित धार्मिक शास्त्रों के अनुसार आस्तिक बातें बताने जा रहा हूँ महादेव शिव के प्रतीक शिवलिंग को घर में स्थापित किया है। तो आपको उस महान शिवलिंग की निश्चित रूप से पूजा अर्चना करना चाहिए अगर आप शिवलिंग को बिना पूजा अर्चना के अपने घर में रखते हैं। तो इसका प्रभाव विपरीत पड़ता है आइए जानते हैं शिवलिंग से जुड़ी हुई कुछ धार्मिक बातें- शिवलिंग को कहां पर स्थापित ना करें: शिवलिंग को कभी भी ऐसे स्थान पर स्थापित नहीं करना चाहिए जहां पर उसकी पूजा ना हो हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि शिवलिंग की पूजा अगर आप विधि विधानपूर्वक नहीं कर पा रहे हैं। अर्थार्थ आप पूजा करने में असमर्थ है तो आप शिवलिंग को अपने घर में भूलवश भी ना रखें क्योंकि ऐसा करने से भगवान महाशिव का अपमान समझा जाता है। हल्दी तथा कुमकुम का प्रयोग: हिंदू मान्यताओं के अनुसार हल्दी का प्रयोग महिलाएं अपनी सुंदरता को निहारने के लिए करती हैं, और कुमकुम का प्रयोग महिला अपने पति की लंबी आयु के लिए करती है। अर्थात इन दो चीजों का प्रयोग भगवान के शिवलिंग पर कभी नहीं करना चाहिए। शिवलिंग को कैस...

भगवान शिव के इस पुत्र ने अपनी ही माँ पर डाली थी बुरी नजर, जानिए आखिर कौन था ये पुत्र

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हम सभी यह बात जरूर जानते हैं कि भगवान शिव और मां पार्वती के 2 पुत्र थे। जिनका नाम गणेश और कार्तिकेय था। संसार में यह माना जाता है कि इन दोनों पुत्र में से गणेश जी सबसे बुद्धिमान थे। परंतु आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि भगवान शिव के एक तीसरे पुत्र भी थे। जिसका नाम अंधक था। भगवान शिव ने स्वयं ही अंधक का वध किया था। ऐसा माना जाता है कि एक बार भगवान शिव और पार्वती काशी घूमने निकले थे। भगवान शिव जब अपना मुख पूर्व दिशा की ओर करके बैठे थे। तब पीछे से आकर माता पार्वती ने उनकी आंखें बंद कर दी और संसार में अंधेरा छा गया। भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपनी तीसरी आंख खोली जिसके कारण संसार वापस प्रकाशमय हो गया। भगवान शिव के तीसरी आंख खुलने के कारण पीछे खड़ी माता पार्वती को बेहद पसीने आने लगे और उसी पसीने में से उनके तीसरे पुत्र का जन्म हुआ। कहा जाता है कि उनके तीसरे पुत्र का नाम अंधक था क्योंकि वह संसार में अंधकार आने पर पैदा हुआ था। बचपन से ही अंधक को भगवान शिव जी ने असुरों को सौंप दिया था। जिसके चलते अंधक अपने माता-पिता से अनजान था। अंधक को ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था कि उसकी मृत्यु क...

मलमास में तुलसी की पूजा करने से मिलती है श्रीहरि की कृपा

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16 मई से अधिक मास प्रारंभ हो चुका है और हिन्दू धर्म के अंतर्गत यह महीना किसी भी शुभ कार्य के लिए सही नहीं माना जाता है। इस दौरान कोई भी नया कार्य जैसे कि गृह प्रवेश, विवाह आदि से नहीं किए जाते। यह महीना मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है जो भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए अधिकमास या मलसाम में भगवान विष्णु की आराधना की जाती है, उन्हें प्रसन्न रखने के लिए विभिन्न पूजाएं और पाठ किए जाते हैं। भगवान विष्णु को तुलसी का पौधा अत्यंत प्रिय है, इसलिए मलमास के दौरान तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन तुलसी पूजा के दौरान आपको क्या करना चाहिए और किन बातों का ख्याल रखना चाहिए, आइए जानते हैं। तुलसी के पौधे को रोज सुबह-शाम जल चढ़ाएं और शाम के समय घी का दीपक भी जलाएं। एक बात का ध्यान हमेशा रखें कि पूजा के दौरान कभी तुलसी के पौधे को स्पर्श ना करें। दिन और रात के समय तुलसी पूजा करते समय तुलसी मंत्र “वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।। एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता” का जा...

जानिए शिवपुराण के अनुसार कैसे हुई थी मंगल की उत्पत्ति

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शिवपुराण के अनुसार मंगल देव अर्थात मंगल ग्रह जिन्हें युद्ध का देवता भी कहा जाता है वह भगवान शिव का ही पुत्र है. उसकी उत्पति का समय शिव पुराण के अनुसार गणेश और कार्तिकेय से पहले हुई थी. उनके शरीर का वर्ण लाल है और उनकी चार भुजाएँ है. जानिए कैसे हुई थी मंगल उत्पत्ति शिवपुराण के अनुसार जब सती ने दक्ष यज्ञ में देह त्याग दिया तो शिवजी संसार से विरक्त हो गए. कैलास पर्वत पर अपनी पत्नी सती को ना पाकर वह हजारों वर्षो के लिए तप्य्सा करने के लिए चले गए. उस समय अधिक तपस्या के कारण उनके मस्तक से श्रमजल अर्थात पसीने की कुछ बुँदे पृथ्वी पर गिरी. वह श्रमजल की बुंद पृथ्वी पर गिरकर एक मनोहर शिशु में बदल गई. वह शिशु की कांति रक्त वर्ण थी. उसकी चार भुजाएँ थी. प्रकट होकर उस शिशु ने रोना शुरू कर दिया तब पृथ्वी देवी एक सुंदर स्त्री रूप में वहां पर प्रकट हुई. उन्होंने उस शिशु को अपनी गोद में उठा लिया. उनके हाथों में आकर वह शिशु ने रोना बंध कर दिया और उनके हाथो में खेलने लगा. उस समय भगवान शिव ने पृथ्वी से कहा कि यह शिशु मेरे श्रमजल से उत्पन्न हुआ है. इसलिए यह मेरा पुत्र है. फिर भी यह तुम्हार...

पूजा-पाठ में कोई गलती हो जाये तो करे इस मंत्र का जाप पूजा का पूरा फल फिर से मिल जायेगा

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हिंन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार अगर कोई भी व्यक्ति जाने और अनजाने में पूजा करते समय कोई गलती कर दे तो भगवान खुश होने की जगह नाराज हो सकते है। और फिर व्यक्ति को इसका फल भुगतना पड़ सकता है। पूजा पाठ और हवन में व्यक्ति द्वारा जाने अनजाने में गलतियां हो ही जाती है। लेकिन इस बात से परेशान न हो हिन्दू धर्म शास्त्रों में हर परेशानी का एक उचित समाधान होता है। इसी प्रकार पूजा पाठ के हुई गलतियों का समाधान ये एक मंत्र है। गलती होते ही इस मंत्र का जाप करे इससे हर प्रकार की गलती की माफ़ी मिल जाती है। और पूजा का पूरा फल प्राप्त होगा। मंत्र - 'अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।। गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च। आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।।' इस का मतलब है भगवान में आपका दास हूँ और मुझ से हर दिन गलतिया हो जाती है। और मेरी सभी गलतियों के समझकर मुझे माफ़ कर देना में आपका आभारी रहूँगा। और मुझे आशीर्वाद दो आपके दर्शन से मेरे जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाये।

इस देशभक्त को फांसी चढ़ाने में छूट गए थे अंग्रेजों के पसीने, देवी मां ने स्वयं दिया था वरदान

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देश में कई ऐसे मंदिर हैं जो काफी मशहूर है। वही कुछ ऐसे भी हैं जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। इन मंदिरों के पीछे की कहानी काफी रोचक है। स्थानीय लोगों का इन मंदिरों के प्रति गहरी श्रद्धा है। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके पीछे का इतिहास काफी मर्मस्पर्शी है। गोरखपुर से 20 किलोमीटर तथा चौरी-चौरा से 5 किलोमीटर की दूरी पर तरकुलहा देवी मंदिर स्थित है। यहां लोगों की ऐसी मान्यता है कि मां महाकाली के रूप में यहां विराजमान जगराता माता तरकुलही पिंडी के रूप में विराजित हैं। इस मंदिर के बारे में पूरी बात जानने के लिए हमें भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम का रूख करना होगा। डुमरी के क्रांतिकारी बाबू बंधू सिंह के पूर्वजों ने साल 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम से भी पहले एक ताड़ के पेड़ के नीचे पिंडियां स्थापित कर इस मंदिर का निर्माण किया था। आपको बता दें कि बाबू बंधू सिंह को गोरिल्ला युद्ध में महारथ हासिल थी। इसी के माध्यम से वो अंग्रेजों पर वार करते थे। उस वक्त बिहार और देवरिया जाने के लिए अंग्रेजों को शत्रुघ्नपुर के जंगल से ही होकर जाना पड़ता थ...

इस मंत्र जाप से मिलता है अचानक से आई मुसीबतों से छुटकारा

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यदि आप किसी मुसीबत में फंसे हुए है और परेशान है तो आपको निचे दिए गये उपायों को जरुर आजमाना चाहिए इससे आपको राहत महसूस होंगी और आपका काम भी सिद्ध हो जायेगा, तो क्या है वो उपाय आइये जानते है. ॐ गं गणपतये नमः इस मंत्र का जाप करने से आपकी नौकरी में आई मुसीबतें अचानक ही कही गायब हो जाएगी और आपका मन भी ठीक से काम करने के लिए लगा रहेगा. इसके लिए आप को रोज सुबह तिन से ग्यारह माला करनी चाहिए. इससे भगवान गणेश जल्द ही प्रसन्न हो जाते है और आप पर अपनी कृपा बरसाने लगते है और आपका सभी काम सिर्फ 2 दिनों के अंदर ही पूरा हो जायेगा. ॐ ह्रीं गौर्ये नमः इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में आई सभी मुसीबतें जल्द ही अपना रुख बदल लेती है और आपके साथ सबकुछ अच्छा होने लगता है. इसके लिए आपको माता दुर्गा के समक्ष बैठकर हर रोज 11 माला का जाप करना चाहिए. वैवाहिक जीवन में आई और आने वाली सभी मुसीबते जल्द ही गायब हो जाती है. ॐ नमः शिवाय इस मंत्र का जाप 27 दिनों तक लगातार करते रहना चाहिए, इसके लिए आपको प्रतिदिन सुबह नित्य कर्म करके भगवान शिव की प्रतिमा के सामने बैठ कर 11 माला करनी चाहिए इस...

इन कारणों से नहीं मिलता किस्मत का साथ, पांच मिनिट की इस पूजा से जाग उठेगा सोया हुआ भाग्य

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जीवन में भाग्य का सबसे ज्यादा महत्व है। कई लोगों को बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के धन-यश-सम्मान प्राप्त हो जाता है जबकि कई हुनरमंद जीतोड़ मेहनत के बाद भी असफलता ही पाते हैं। इसे भाग्य का खेल कहा जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार नौ ग्रहों में बृहस्पति- गुरु भाग्य के कारक माने जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह से संबंधित कोई दोष होता है तो उसे भाग्य का साथ नहीं मिल पाता है। बृहस्पति चूंकि भाग्य का कारक ग्रह ह इसलिए कुंडली में इसकी स्थिति अच्छी होना अनिवार्य है अन्यथा जीवन भर ठोंकरे ही खाते रहेंगे। बृहस्पति अर्थात् गुरु ग्रह से शुभ फल पाने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं। शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित जनार्दन शुक्ला के अनुसार गुरु ग्रह के ये उपाय गुरुवार को किए जाने चाहिए। इससे भाग्य की बाधाएं दूर हो सकती हैं, सोया हुआ भाग्य जाग उठता है। गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें या भगवान ब्रह्मा की पूजा करें। बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए शिवपूजा का भी बड़ा महत्व है। इसके लिए तांबे के लोटे में पानी लें और इसमें केसर मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ ...

भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को बताया था कलयुग से जुड़ा ये रहस्य, कर देगा अचंभित

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आज इस पोस्ट में हम रामायण से जुड़ा एक ऐसा वाकया आपको बता रहे हैं, जिसके बारे में शायद ही आप में से किसी ने कभी सुना होगा कि जब रावण माता सीता का हरण करके उन्हें अपनी सोने की लंका में ले गया था और उनकी तलाश करते करते भगवान श्रीराम लंका तक पहुंच गए थे। भगवान श्रीराम जब लंका के समीप पहुंचे तो उनके लिए सबसे बड़ी समस्या थी कि उनके और रावण की लंका के बीच समुद्र को पार करना। आज हम भगवान श्री राम से जुड़े जिस वाकये का आप से जिक्र करने जा रहे हैं, वह वाकया रामायण काल के दौरान रामसेतु के निर्माण से जुड़ा हुआ है। जब भगवान श्रीराम ने रामसेतु के निर्माण हेतु समुंद्र देव से मदद मांगी थी तब समुद्र देव ने भगवान श्रीराम को बताया कि आप की सेना में मौजूद नल और नील ऐसे प्राणी हैं जिन्हे इस पुल के निर्माण के कार्य की पूरी जानकारी है, समुद्र देव ने भगवान श्रीराम से कहा कि नल और नील आपकी कृपा और आज्ञा से इस समुद्र पर सेतु बनाने के कार्य में अवश्य सफल होंगे। समुद्र देव के कहे अनुसार भगवान श्रीराम ने नल और नील को अपने पास बुलाकर, इस रामसेतु के निर्माण का कार्य सौंप दिया। इस सेतु के निर्माण की ...

जानिए कैसे यह राजा स्वर्ग का इंद्र बना और कैसे उसका स्वर्ग से पतन हो गया

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पुराणों के अनुसार चन्द्र वंश में एक प्रसिद्ध राजा हुआ जिसका नाम नहुष था. जो बहुत बड़ा धर्मात्मा था परंतु दोस्तों सत्ता का मद एक ऐसी चीज है जिसकी वजह से बड़े बड़े धर्मात्मा भी अधर्म के मार्ग पर चलने लगते है. ऐसा ही हुआ था राजा नहुष के साथ. जब इंद्र के द्वारा विश्वकर्मा के पुत्र वृत्रासुर का वध हुआ तो इंद्र को ब्रह्महत्या का पाप लग गया और वह उस पाप का प्रायश्चित करने के लिए एक हजार वर्ष के लिए तपस्या करने के लिए चला गया. उस समय स्वर्ग का इन्द्रासन बिना राजा के खाली पड़ा हुआ था. इसलिए सब देवतों ने ब्रह्मर्षियों के साथ परामर्श करके राजा नहुष को स्वर्ग का राजा बना दिया. स्वर्ग का राज्य प्राप्त होने के कारण उसमे अहंकार उत्पन्न हो गया. वह इन्द्रासन के साथ साथ इंद्र की पत्नी शची पर भी अपना अधिकार समझने लगा. शची एक महान पतिव्रता स्त्री थी. उसपर बुरी नियत का उसे दंड तो मिलना ही था. शची ने अपने पतिव्रत धर्म की रक्षा के लिए नहुष से यह कहलवाया कि वह नहुष से सिर्फ एक शर्त पर मिलने को तैयार है अगर वह ब्रह्मर्षियों द्वारा ढोयी हुई पालकी में बैठ कर उससे मिलने के लिए आये. नहुष ने शची ...