कृष्ण के मित्र सुदामा का वध क्यों किया था भगवान शिव ने, सच जानकर रह जायेंगे अचम्भित

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों के एक अद्भुत सत्य के बारे में जिसके पर में शायद आप विश्वास ना करें किंतु यह बात एकदम सत्य है। जिसका उल्लेख हमें आज भी शास्त्रों में मिलता है कि कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा का वध भगवान शिव ने ही किया था। आज हम आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि भगवान शिव ने सुदामा का वध क्यों और कैसे किया था। सुदामा का पुनर्जन्म रहस्य: सुदामा की मृत्यु के पश्चात जब सुदामा को स्वर्ग लोक में रहने का स्थान प्राप्त हुआ था तब स्वर्ग लोक में सुदामा और विराजा दोनों निवास करते थे। सुदामा विराजा से अद्भुत प्रेम करते थे किंतु यह विराजा भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी जब श्री कृष्ण और विराजा अपने प्रेम में लीन थे। तो उस समय राधा जी वहां पर प्रकट हो गई थी तथा उन्होंने विराजा को ऐसा देख कर के पृथ्वी लोक पर निवास करने का श्राप दे दिया था।उसी प्रकार किसी कारणवश राधा ने सुदामा को भी श्राप देकर के प्रथ्वीलोक पर भेज दिया था। सुदामा और विराजा का पुनर्जन्म: जब सुदामा और विराजा को श्राप के कारण पृथ्वी पर आना पड़ा तो सुदामा का जन्म एक शंखचूर्ण नामक राक्षस के रूप में ह...

आत्मा को कितने दिन बाद मिलता है दूसरा शरीर, जानकर चौक जाएंगे आप

दोस्तों जैसा कि सबको पता है कि आत्मा अजर अमर है आत्मा को कभी कोई नहीं मार सकता जैसे हमारा शरीर एक वस्त्र को उतार कर दूसरा वस्त्र पहनता है वैसे ही हमारी आत्मा हमारा एक शरीर को छोड़ दूसरा शरीर धारण करता है, लेकिन दोस्तों एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर को प्राप्त करने का अर्थ शरीर से नहीं है, यह निर्भर करता है आपके कर्मों और प्रकृति के देन के अनुसार। मृत्यु के बाद आत्मा किसी भी शरीर में प्रवेश नहीं कर सकती, नियति उसे किसी शरीर में प्रवेश करने का निर्णय लेती है। मृत्यु के बाद इंसान की आत्मा कितने दिन तक भटकती रहेगी इसके बारे में हमारे हिंदू धर्म के वेद पुराणों में लिखी हुई है।

दोस्तों एक शरीर को छोड़ने के बाद आत्मा नियमित रूप से किसी भी शरीर को धारण नहीं कर सकती है। किसी आत्मा को दूसरा शरीर धारण करने में बहुत दिक्कतें होती हैं और बहुत भटकना पड़ता है, लेकिन किसी-किसी आत्माओं को 3 दिन के भीतर ही दूसरा शरीर मिल जाता है। दोस्तों इनमें से कुछ आत्माएं ऐसी भी होती है जो 10 या 13 दिन में दूसरे शरीर को धारण करती है, इसी कारण दोस्तों हमारे हिंदू धर्म में 10वीं और 13वी मनाई जाती है।

दोस्तों इनमें से कुछ ऐसी आत्माएं भी होती है जो समय से पूर्व की शिक्षाओं के पूर्ण होने से पहले मृत्यु के हवाले हो जाती है जिसकी वजह से वह दूसरे शरीर में प्रवेश ना करने के लिए हठ करने लागती है, इसीलिए उन आत्माओं को दूसरी शरीर धारण करने में 37 या 40 दिन लग जाते हैं। दोस्तों हमारे हिंदू धर्म में बर्सि की जाती है, इसका अर्थ यह होता है दोस्तों कि अगर उनके प्रिय जनों की आत्मा मैं किसी कारणवश अगर प्रेतयोनि मे चली गयी हो और दूसरा शरीर धारण नहीं किया है तो वह उस समय दूसरी शरीर को धारण कर लें।

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